उर्गम घाटी की आराध्य भगवती गौरा आज पहुंची अपने मायके

उर्गम घाटी की आराध्य भगवती गौरा आज मायके पहुँची

-रघुवीर नेगी /केदारखण्ड एक्सप्रेस 
चमोली। पौराणिक परम्परा के अनुसार भगवती गौरा देवग्राम के भल्ला वंशज नेगी परिवारों की कुलदेवी है जिसका मंदिर देवग्राम में स्थित है यहाँ देवी की बेटी के रूप में पूजा होती है नौ दिवसीय मेले के बाद चैत मास में भगवती गौरा का विवाह होता है भगवान शिव के सा है थ विवाह के बाद देवी कैलाश चली जाती है जिसका स्थान सोना शिखर माना जाता है। भादों मास की दूज तिथि को भगवती की कंडी छतोली कटार स्थानीय उत्पाद समूण च्यूड़ा भुजेली काकडी मुगरी के साथ भल्ला वंशज के नेगी परिवार एक रात्रि फ्यूलानारायण मंदिर में विश्राम करते है और सुबह 6 बजे रोखनी बुग्याल के समीप गौरा की ब्रहम कमल की वाटिका में जात करते है जागरों के माध्यम से देवी का आह्वान किया जाता है ब्रहम कमल की पूजा कर कंडी छतोली में ब्रहम कमल लायी जाती है देवी भवरे के रूप में आती है जो अवतारी पश्वा या भाग्यशाली लोगों को दिखाई देती है दोपहर दो बजे तक छतोली फ्यूलानारायण आती है वहां पूजा अर्चना होती है देवी को भोग लगाया भगवान फ्यूलानारायण की धियाण है भगवती गौरा देवी से मिलन व विदा करते समय छलक आती है आंखियां भावुक पल नारायण देवी को मायके के लिए विदा करते है क्योंकि अब फ्यूलानारायण के कपाट बंद होने के कुछ दिन शेष है भगवती भाई नारायण के प्रतिनिधि फ्यूया एवं फ्यूयाण को धीरज बधांते है कि फिर अगले साल तुमसे भैट होगी भीगी नयनों के साथ देवी अपने मायके को सफर पर चल देती है देवग्राम में गौरा मंदिर में फूलकोठा उत्सव होता है जहाँ देवी को भोज लगाया जाता है ब्रहम कमल व प्रसाद भक्तों को वितरण किया जाता है आज से देवी चैत बैशाख माह तक मायके में रहेगी।

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