पहले राज्य बनाने के लिए आंदोलन किया, अब राज्य को बचाने के लिए राजनीति करेंगे : दिवाकर भट्ट

पहले राज्य बनाने के लिए आंदोलन किया,
अब राज्य को बचाने के लिए राजनीति करेंगे : दिवाकर भट्ट

- अनसूया प्रसाद मलासी/केदारखण्ड एक्सप्रेस
उत्तराखंड राज्य आंदोलन में फील्ड मार्शल के नाम से चर्चित दिवाकर भट्ट दूसरी बार उत्तराखंड क्रांति दल के अध्यक्ष बने हैं। अगस्त्यमुनि में उक्रांद के जिला सम्मेलन में शामिल होने के लिए यहाँ आये तो उनसे राज्य के विभिन्न मुद्दों पर लंबी बातचीत की :-

सवाल :- राज्य गठन के दो दशक बाद आप राज्य को बचाने के लिए आंदोलन कर रहे हैं, क्या है इसके पीछे मकसद!
 भट्ट :- उत्तराखंड राज्य आंदोलन में हमारे लोगों ने बड़ी कुर्बानी दी। हमारे अपने सपने थे। राजधानी गैरसैंण, मूल निवास प्रमाण-पत्र, पर्वतीय क्षेत्रों का समुचित विकास, पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी को बचाने का जो सपना राज्य आंदोलनकारियों की आँखों में था, वह भाजपा- कांग्रेस की बारी-बारी से सत्ता में रहने के कारण अधूरा ही रह गया है। इसीलिए हम जनता के बीच में हैं और जनता का विश्वास लेकर फिर से एक आंदोलन इसके लिए कर रहे हैं।

सवाल :-राज्य गठन से पहले और राज्य गठन के बाद भी उत्तराखंड क्रांति दल के विधायक चुनकर आते थे, लेकिन आज एक भी विधायक विधानसभा में नहीं है। इसके लिए कौन जिम्मेदार है?
भट्ट :- राज्य आंदोलन के  प्रचंड दौर में हमने 'राज्य नहीं  तो चुनाव नहीं' का नारा देकर एक बड़ी गलती की है, जिसका खामियाजा दल को और राज्य की जनता को भुगतना पड़ा है। अब हम सचेत हो गए हैं। पहले हमने सिर्फ राज्य निर्माण के लिए आंदोलन किये, भाजपा-कांग्रेस ने उसका फायदा उठाया।  पहले हमने राजनीति नहीं की, सिर्फ आंदोलन किया। अब उत्तराखंड बचाने के लिए, उत्तराखंड के सवालों को हल करने के लिए राजनीतिक भूमिका में सामने आ रहे हैं। हम जनता के बीच अपनी पैठ बनाकर तथा जनता के सवालों को लेकर के सफल होंगे और 2022 के चुनाव में एक बड़ी ताकत बनकर उभरेंगे।
सवाल :- आपने प्रस्तावित राजधानी भरारीसैंण (गैरसैंण) में शहीद स्मारक के लिए संघर्ष का ऐलान किया है, जबकि अभी तक सरकार वहाँ राजधानी की घोषणा नहीं कर पाई है।
 भट्ट :- भरारीसैंण (गैरसैण) में सरकार ने करोड़ों की लागत से विशाल विधानसभा भवन बना दिया है। देर-सबेर वहाँ राजधानी बननी ही है। तो वहाँ पर शहीद स्मारक होना ही चाहिए। सरकार को हमने 3 महीने का वक्त दिया है कि वह भरारीसैंण में शहीद स्मारक के लिए जगह चिन्हित करे, अन्यथा उक्रांद इस मामले में स्वयं पहल करेगा।

सवाल :-  मूल निवास प्रमाण-पत्र खत्म हो गया। समूह ग में पूरे देश से आवेदन मांगे गए हैं। इससे हमारे युवा वर्ग के हितों पर कुठाराघात हुआ है। हम सरकार से ऐसी नीति की मांग करते हैं कि समूह ग में कम से कम 70% हमारे यहाँ के युवा लगें। देश की आबादी के हिसाब से हमारी युवा करने पाएंगे

सवाल :- देवप्रयाग में शराब की फैक्ट्री लगाने का विरोध करने का औचित्य क्या है?
भट्ट :- कांग्रेस सरकार में कैबिनेट मंत्री, मंत्री प्रसाद नैथानी की पहल पर देवप्रयाग में बीयर बनाने की फैक्ट्री लगी थी लेकिन धीरे-धीरे सरकार ने उसको शराब फैक्टरी में बदल दिया है। सरकार ने पहाड़ को नशे में डुबो दिया है। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए, कि क्या भविष्य में सरकार पुलिस थाने खोलकर, भांग की खेती को बढ़ावा देकर, पहाड़ में अंधाधुंध शराब की दुकानें खोलकर और राजस्व बढ़ाने के लिए अब क्या कच्ची शराब की भट्टियों को भी लाइसेंस दे रही है? यदि हम अभी भी नहीं चेते तो अगले दशक तक पहाड़ के लोग यहीं अल्पसंख्यक हो जाएंगे और बाहर के लोगों का यहाँ अधिपत्य हो जाएगा। इसलिए पहाड़ को बचाने, यहाँ की संस्कृति, सभ्यता, धार्मिक स्वरूप को बचाने के लिए यह जरूरी है कि पहाड़ को शराब से मुक्त किया जाए। इसके लिए जो भी बन पड़ेगा हम करने के लिए तैयार हैं। चाहे कोई भी कुर्बानी क्यों न देनी पड़े।

सवाल :-  उत्तराखंड क्रांति दल में राज्य बनने से पहले और बाद में कई बार टूट-फूट हो गई है। अब क्या गारंटी है कि भविष्य में नेता एक ही छतरी के नीचे रहेंगे?
भट्ट :- हमने अपनी गलतियों से बहुत कुछ खोया है। यदि हम गलत निर्णय नहीं लेते तो आज देश की तरह उत्तराखंड में भी क्षेत्रीय दल के रूप में यूकेडी की सत्ता होती। इस विश्वास के साथ हम जनता के बीच में पुनः जा रहे हैं, कि जो गलतियां हुई, उनको दोबारा नहीं करेंगे और जनता के हितों के लिए जो संघर्ष हमारा दल कर सकता है, वह कोई नहीं कर सकता।
पहले राज्य बनाने के लिए आंदोलन किया, अब राज्य को बचाने के लिए राजनीति करेंगे : दिवाकर भट्ट पहले राज्य बनाने के लिए आंदोलन किया,  अब राज्य को बचाने के लिए राजनीति करेंगे : दिवाकर भट्ट Reviewed by केदारखण्ड एक्सप्रेस on September 12, 2019 Rating: 5
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