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Tuesday, 17 September 2019

22वें वर्ष में परिवेश रूद्रप्रयाग जनपद : 22 वर्षों में कहां खड़ा है जनपद

22वें वर्ष में परिवेश रूद्रप्रयाग जनपद :  22 वर्षों में कहां खड़ा है जनपद

-कुलदीप राणा "आजाद"
रूद्रप्रयाग। जनपद 22 वर्ष का युवा हो चुका है। दो दशकों के सफर में जनपद ने कई कीर्तिमान भी स्थापित किये हैं। टिहरी पौडी और चमोली जनपद के पुछल्ले भागों को मिलाकर 17 सितम्बर 1997 में अस्तित्व में आने के बाद से ही सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन पहले से बेहतर  हुआ है। गांव-गावों तक सड़क मार्गों  के पहुंचने से ग्रामीण भी विकास की मुख्य धारा से जुड़े हैं। सभी सरकारी विभागों के स्थापित होने से लोगों को सरकारी काम करने में काफी हद तक सहुलियत हुई है। लेकिन जो एकजुटता यहां के सामाजिक, राजनैतिक और पत्रकार संगठनों ने तहसील और जिला निर्माण में दिखाई थी, वह इस जनपद के व्यवस्थित और ढांचागत विकास करने में नहीं दिखा पाये जिसका परिणाम ये हुआ की आज महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालय एक जगह होने के बजाय चारों दिशाओं में मुख्यालय से दूर छितरा कर बनाये गये हैं जिन तक पहुंचने के लिए आवागमन का भी कोई साधन नहीं हैं। जिला कार्यालय मुख्यालय से 4 किमी दूर रूद्रप्रयाग पोखरी मोटर मार्ग पर बना है तो विकास भवन भी इतनी ही दूरी पर कोटेश्वर चोपड़ा मोटर मार्ग पर खुरड के पास बनाया गया है। जबकि तहसील कार्यालय मुख्यालय से 4 किमी दूर रूद्रप्रयाग गौरीकुण्ड राष्ट्रीय राजमार्ग पर बनाया गया है।  इसी कार्यालय से एक किमी आगे उद्योग विभाग का कार्यलय है। जबकि वन विभाग मुख्यालय से 8 किमी दूर  रुद्रप्रयाग  श्रीनगर बाईपास पर बनाया गया है। कई अन्य विभाग मुख्यालय में ही अलग-अलग जगह स्थापित हैं। इन कार्यालयो में जाने के लिए  समय के साथ ही भारी धन का खर्च करना पड़ता है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता हैं कि आम नागरिकों को इन अनियोजित तरीके से बनाये गये सरकारी विभागों तक पहुंचने में कितनी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

उधर जनपद निर्माण के 15 वर्षों तक जनपद में जिलाधिकारियों की तैनाती केवल प्रशिक्षु के रूप में हुई है। जबकि मुख्य विकास अधिकारी केवल सेवा निवृत्ति होने के लिये यहाँ आये हैं। पहली बार 2013 की आपदा के बाद   जिलाधिकारी डॉ राघव लंगर ने यहां चार वर्षों तक अपनी सेवायें दी हैं अन्यथा यहां की स्थिति ये थी कि-"बोरा बिस्तर बान्ध के,  डीएम सुबह शाम के"!! 21 वर्षों में 22 जिलाधिकारियों की तैनाती से साफ जाहिर होता है कि इस जिले का सरकारों द्वारा केवल और केवल राजनीतिकरण किया गया।
इस स्थिति के कारण जनता के कार्य समय पर नहीं हुए हैं और विकासगति भी कछुआ चाल पकडी रही। ऊपर से हर साल आपदाओं के कहर से जनपद त्रस्त है। लोगों का पलायन का दौर भी जारी रहा।  सरकारों से मदद न मिलने के कारण  लोगों का विश्वास सरकारी तंत्र से पूरी तरह उठता चला गया।
जिलाधिकारी डॉ लंगर जी के तबादले के बाद फिर वही तबादलों का दौर जारी हुआ और 6 महीने रही जिलाधिकारी  रंजना वर्मा का भी स्थानातरण कर दिया गया। इसके बाद मई 2017 में  कर्मठ और अपने कर्तव्यों के प्रति लग्न से कार्य करने वाले जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल की तैनाती से रूद्रप्रयाग जनपद में विकास कार्यों में तेजी आई और आम लोगों की छोटी छोटी समस्यायों पर गम्भीरता से ध्यान दिया जाने लगा जिससे समस्यायें आसानी से हल होने  की उम्मीद लोगों में जगने लगी। लोगों को सरकारी तंत्र पर फिर से विश्वास बढने लगा!!  पिछले दो वर्ष से जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल की कार्यशैली ने आम जनमानस में जो शुरूआत में विश्वास जगाया था वो धीरे धीरे कम होने लगा है। जमीन पर काम कम और हवाबाजी अधिक हो रही है, योजनाओं को शुरू कर सोशल मीडिया में फोटो डालने तक ही योजनाएं सिमट गई हैं।
दूसरी ओर रूद्रप्रयाग में अतिरिक्त कार्यों के बोझ से विभागों के मूल कार्यों में भारी व्यवधानों पैदा हो रहा!!  इससे विकास और जनता के कार्य भारी मात्रा में प्रभावित हो रहे है!! केदारनाथ यात्रा में  अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगने से जनता के कार्य समय पर नहीं हो पाते है ऊपर से जिलाधिकारी द्वारा अत्यधिक बैठकों के कारण अधिकारी अपने कार्यों को समय पर नहीं कर पा रहे है!!!
जनपद को सैनिक स्कूल जैसी बडी सौगात तो मिली है लेकिन उसके निर्माण कार्य के अधर में लटकने से लोगो में मायूषी है!!  व्यवसायिक शिक्षा के केन्द्र कृषि महाविद्यालय, आईटीआई, पॉलीटेक्नकल जैसे शिकक्षण संस्थानों में बुनियादी सुविधाएं न होने के कारण वे पूरी तरह हाशिए पर अथवा बंदी के कगार पर पहुँच गये हैं!!!
इन 22 वर्षों का अगर निष्कर्ष निकालते हैं तो एक बात तो साफ हो जाती है कि पैराशूट जनप्रतिनिधियों के उदासीन रवैया इस जनपद के विकास में सबसे बडा बाधक रहा है। जबकि स्थानीय राजनीति की दलगत भावना के कारण विकास कार्यों को ग्रहण लगा हुआ है।
रूद्रप्रयाग जिले में एक वर्ग ने अधिकारियों को अपने काबू में किया हुआ हैं जिनके इशारों पर ही पूरा प्रशासन चल रहा है। अधिकारी केवल सोशल मीडिया में छाये हुए है तो आध्यापक कविता पाठ में मशगूल हैं। आम जनता त्रस्त और हताश निराश नजर आ रही है।
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