पार्ट 2: मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की अधिकारी उड़ा रहे धज्जियां, भ्रष्टाचार छुपाने के लिए ग्रामीणों और शिकायतकर्ता पर बनाया था जाँच कमेटी ने दबाव: ग्रामीणों ने की डीएम से निष्पक्ष जाँच की मांग

पार्ट 2: मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की अधिकारी उड़ा रहे धज्जियां, भ्रष्टाचार छुपाने के लिए ग्रामीणों और शिकायतकर्ता पर बनाया था जाँच कमेटी ने दबाव: ग्रामीणों ने की डीएम से  निष्पक्ष जाँच की मांग 
-कुलदीप राणा आजाद/केदारखण्ड एक्सप्रेस 
रूद्रप्रयाग। गाँवों में हुए भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए अधिकारी कैसे हथकंडे अपनाते हैं और मामले को दबाने के लिए कैसे लीपापोटी करते हैं, इसका एक बड़ा उदाहरण स्यूपुरी गांव में देखने को मिल रहा है। हमने आपको इस खबर के पहले भाग में दिखाया था कि कैसे रूद्रप्रयाग के स्यूपुरी गाँव में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर हुई शिकायत के बाद जाँच कमेटी द्वारा गांव में हुए भ्रष्टाचार को दबाया गया। लेकिन हमारी खबर प्रकाशित करने के बाद कुछ ग्रामीण और शिकायतकर्ता ने हमें एक और बड़े सच से रूबरू करवा है। ग्रामीणों का आरोप है कि जांच कमेटी सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) व कनिष्ठ अभियंता ग्रामीण निर्माण विभाग द्वारा गांव में पाये गए 6 अपूर्ण कार्यों पर पर्दा डालने के लिए ग्रामीणों और शिकायतकर्ता पर भारी दबाव बनाकर उनसे समझौतानामा लिखवाया गया। जबकि कई ग्रामीण जाँच से संतुष्ट न होने के बाद भी उनका फर्जी नाम समझौते नामे पर लिख डाले। अंदाजा लगया जा सकता है कि कैसे मुख्यमंत्री के भ्रष्टाचार मुक्त नारे की अधिकारी खिल्ली उड़ा रहे हैं। 

गौरतलब है कि अगस्त्यमुनि विकासखण्ड के स्यूपुरी गाँव में ग्रामीण भागचन्द्र लाल द्वारा मुखमंत्री हेल्पलाइन में अपने गांव में हुए पिछली पंचवर्षीय योजना के सभी विकास कार्यों की जाँच की मांग की गई थी जिस पर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन से एक जाँच कमेटी का गठन किया गया। जांच शुरू हुई तो पाया कि गांव में पंचायत भवन मरमत, प्रसूति गृह भंगार, खिलपति लाल से प्रेमलाल के मकान तक सी0सी0मार्ग निर्माण, पटूडी बैंड से दलजीत लाल के मकान तक सी0सी0 तथा खडिंजा मार्ग, भंगार में पुश्ता निर्माण तथा सी0सी0 मार्ग, भंगार तोक में पेयजल टैंक मरम्मत कार्य जैसे छः कार्यों के बजट का वारा न्यारा तो किया गया लेकिन धरातल पर काम हुए ही नहीं। कायदे से जाँच कमेटी को इस पर कार्यावाही करनी चाहिए थी, और इसकी रिपोर्ट मुख्यमंत्री हेल्पलाइन को भेजनी चाहिए थी, लेकिन जाँच कमेटी में होशियार अधिकारियों के कारनामे तो देखिए, उन्होंने दूसरे दिन ग्रामीणों पर ही अनैतिक दबाव बनाकर समझौता करवा दिया। अरोप है कि जाँच कमेटी द्वारा गाँव में बने सरकारी धन से गौशालायें, शौचालन, राशनकार्ड आदि को निरस्त करने तथा तरह-तरह के नियम कायदे बताकर ग्रामीणों डरायाकर दबाव बनाया गया। जाँच कमेटी और निवर्तमान प्रधान दलजीत लाल के कारनामे जब केदारखण्ड एक्सप्रेस ने प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया तो ग्रामीणों में हिम्मत आई और उन्होंने कैमरे के सामने खुलकर जाँच कमेटी की पोलपट्टी खोल दी। 

ग्रामीण क्षेत्रों में जन प्रतिनिधियों द्वारा भ्रष्टाचार का यह पहला मामला नहीं है, अमूमन हर गाँव में इस तरह के घोटाले हो रखे हैं। लेकिन मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत की सरकार भ्रष्टाचार खत्म करने जैसे नारों पर वोट बैंक तो जरूर बटोर रहीं है लेकिन उनके भ्रष्टाचार निवारण योजनाओं को उन्हीं के अधिकारी कैसे उनकी नाक के नीचे पलीता लगा रहे हैं स्यूपुरी गाँव इसका ज्वलंत उदाहरण है। उम्मीद है जिले के उच्च अधिकारी इस मामले को गम्भीरता से लेंगे और दोषियों पर कठोर कार्यावाही की जायेगी। 

पार्ट 2: मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की अधिकारी उड़ा रहे धज्जियां, भ्रष्टाचार छुपाने के लिए ग्रामीणों और शिकायतकर्ता पर बनाया था जाँच कमेटी ने दबाव: ग्रामीणों ने की डीएम से निष्पक्ष जाँच की मांग पार्ट 2: मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की अधिकारी उड़ा रहे धज्जियां, भ्रष्टाचार छुपाने के लिए ग्रामीणों और शिकायतकर्ता पर बनाया था जाँच कमेटी ने दबाव: ग्रामीणों ने की डीएम से  निष्पक्ष जाँच की मांग Reviewed by केदारखण्ड एक्सप्रेस on September 20, 2019 Rating: 5
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