सरकार से नाराज शहीद की पत्नी, शहीदों के नाम ना स्कूल ना सड़क

सरकार से नाराज शहीद की पत्नी, शहीदों के नाम ना स्कूल ना सड़क
-कालीचरण रावत/केदारखण्ड एक्सप्रेस
रूद्रप्रयाग। अगस्त्यमुनि विकासखण्ड के ग्राम सोड़ भट्ट गांव के शहीद कर्मेद्र बर्त्वाल की पत्नी बीना बर्त्वाल सरकारों से खासी नाराज नजर आ रही है। उन्होंने कहा की देश के लिए मर मिटने वाले वह के प्रति सरकार का रवैया बिल्कुल ठीक नहीं है। नेता मंत्री हर वक्त शहीदों के नाम पर सडक स्कूल बनवाने की बाते तो बहुत करते हैं लेकिन व्यवहार में नहीं उतारते हैं। 

कर्मेद्र की फोटो लिए पत्नी 
दरअसल सौडभट्टगांव में जन्मे कर्मेन्द्र बर्त्वाल ने इंटर की पढ़ाई के बाद लैंसडाउन सेंटर से भर्ती हुए तो चौदहवी गढ़वाल राइफल में ड्यूटी ज्वाइन की। 36 RR में देश सेवा के लिए उनकी पहली तैनाती जम्मू कश्मीर के अनन्तनाग जिले के कारगिल में हुई।  देश सेवा करते हुए 31 मार्च 1999 को कारगिल कश्मीर में आतंकवादी के साथ मुठभेड़ में शहीद हो गए। मुठभेड़ में 2 आतंकवादियों को भी  मार गिराया।शहीद कर्मेन्द्र बर्त्वाल की वीरता को देखते हुए सेना द्वारा उन्हें मरणोपरांत सेना मेडल से सम्मानित भी किया गया।
उधर शहीद कर्मेद्र बर्त्वाल अपने पीछे अपनी 20 वर्षीय पत्नी,  बूढे माँ बाप, पांच  भाई बहनों छोड़ गये। जबकि शहीद कर्मेन्द्र बर्त्वाल के बढ़े भाई उसी दौरान 11 गढ़वाल राइफल में सेना में भर्ती हुए थे।

 शहीद कर्मेद्र की शहादत तो बीस वर्ष बीत चुके हैं लेकिन 20 वर्षों के बाद भी सरकारें इस जांबाज़ सिपाई की वीरता का इनाम नहीं दे पाई है। शहीद की पत्नी  बीना बर्त्वाल का कहना है कि मुझे पति की सहादत पर गर्व तो है !मगर दुःख इस बात का है कि जहां एक तरफ विजय दिवस मनाए जाते हैं शहीदो की विधवाओं को शॉल ओढाकर  शहीद को देने की कोशिश की जाती है लेकिन असल में उनको सम्मान नहीं दिया जाता है। जो वो मांग कर रहे उसे नजरअंदाज कर कर उन्हें अंदर से कचोटता है। वे आगे कहती हैं खुद के लिए उन्होंने कभी भी सरकारों से कोई दरकार नहीं लगाई है बल्कि  सन 1999-से आज तक उत्तर प्रदेश से लेकर उत्तराखंड सरकार से व जिला प्रशासन रुद्रप्रयाग से शहीद के संम्मान में किसी सरकारी संस्थापक , हॉस्पिटल,विद्यालय,या किसी मोटर मार्ग का नाम शहीद के नाम से न होना ही दुख की बात है। कोई सरकारी संस्था का नाम शहीद के नाम से होता तो हमेशा शहीद की यादें अपने जनपद की माटी के साथ जुड़ी रहे शहीद की पत्नी का कहना है आज भी हमारे परिवार से शहीद का भतीजा 20 गढ़वाल राइफल मैं देश सेवा कर रहा है जिसका हमें गर्व है परंतु  उत्तराखंड सरकार व जिला प्रशासन द्वारा जिस प्रकार से शहीद की सहादत का संम्मान नहीं किया गया उसका मुझे अंतिम सांस तक मलाल रहेगा! क्योंकि मेरा जीवन तो शहीद की यादों मैं आखिरी सांस तक जैसे -कैसे कट ही जायेगा  मगर शहीद की माटी के जनप्रतिनिधियों शहीद के प्रति दिखावटी श्रद्धाजंलि हमेशा मेरे पति और मुझ सहित सैनिक परिवारों को समय -समय पे चोट पहुचाती रहेगी। 
सरकार से नाराज शहीद की पत्नी, शहीदों के नाम ना स्कूल ना सड़क सरकार से नाराज शहीद की पत्नी, शहीदों के नाम ना स्कूल ना सड़क Reviewed by केदारखण्ड एक्सप्रेस on August 15, 2019 Rating: 5
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