पंचायत चुनाव से हो शुरूआत, बड़े लक्ष्य की शुरुआत छोटे-छोटे कदमों से ही।

आओ, राजनीति में एक नया चेहरा तलाशें!
मानो न मानो, कहीं धुआं नजर आए तो आग भी होगी
रुद्रप्रयाग में नजर आने लगा है जरा-जरा सा धुआं

पंचायत चुनाव से हो शुरूआत, बड़े लक्ष्य की शुरुआत छोटे-छोटे कदमों से ही।
-गुणानंद जखमोला
मेरा मानना है कि उत्तराखंड जैसे छोटे प्रदेश में हमें नई शुरुआत करने की कोशिश करनी चाहिए। दरअसल, इस राज्य का दुर्भाग्य यह रहा कि हम राज्य के लिए तैयार नहीं थे और हमारी झोली में राज्य गिर गया। आंदोलन तो किया पर राज्य की दशा और दिशा को लेकर किसी को समझ नहीं थी। राजनीति और प्रशासनिक समझ तो बिल्कुल नहीं। सब भावनात्मक था। इसलिए जब राज्य मिला तो आंदोलनकारी नौकरी और भाजपा और कांग्रेस की गोदी में बैठ गये। 

क्षेत्रीय दल धरातल पर रहे ही नही तो राज्य पनप नहीं सका। पंजीकृत ठेकेदारों को हम राज्य की सबसे बड़ी पंचायत के लिए चुनने लगे। प्रापर्टी डीलर और कमीशनखोरी में जुटे लोग हमारे भाग्यविधाता बन गये। चूंकि हमारी सोच राष्ट्रीय है इसलिए हमने चेहरा न देख दलों को वोट दिये और हमारी बदनसीबी यहां चली आई। 
आज जब चारों ओर घना अंधियारा है। तो हमें रोशनी की किरण की तलाश है। 

मैं केदारनाथ आपदा के वर्ष 2013 से देख रहा हूं कि रुद्रप्रयाग का एक युवा मोहित डिमरी लगातार लोगों के बीच है। उसका दिल किसी भी गरीब और असहाय की पीड़ा देख पिघल उठता है। उसके पास संसाधन नहीं हैं, वह संपन्न नहीं है, लेकिन वह जूझता है, हार नहीं मानता है और दूसरों की लड़ाई को अपना समझता है। वह गैरसैण राजधानी की लड़ाई लड़ रहा है। पर्यावरण के हित में काम कर रहा है। चारधाम सड़क को बनाने के लिए प्रभावित दुकानदारों और भवन स्वामियों के लिए काम किया और लड़ाई को मुकाम तक पहुँचाया। वह गरीबों का आशियां बसाने में, उनका इलाज करवाने में सबसे आगे रहता है। रुद्रप्रयाग की हर छोटी-बड़ी समस्या के लिये लड़ता है। जितना मैंने उसे देखा और समझा है वह एक उम्मीद की किरण नजर आता है।

आज जब प्रतिस्पर्धा का दौर है। हर मां-बाप चाहते हैं कि उसका बेटा डाक्टर, इंजीनियर बने। युवा भी राजनीति को कीचड़ समझते हैं। उनकी धारणा है कि केवल पैसे वाले ही नेता बनते हैं या विरासत में नेतृत्व का मौका मिलता है। राजनीति के कीचड़ में कौन उतरेगा? लेकिन यदि हम कीचड़ में नहीं उतरेंगे तो कीचड़ साफ कौन करेगा? यह तय है कि यदि आप समाज को अच्छी सोच, विचार और कर्म करके दिखाओगे तो समाज आपको अपनाएगा ही। समाज भी अच्छा चुनता है लेकिन जब विकल्प हो तो। युवाओं को राजनीति में अब विकल्प बनना होगा। बासी और थके हुए चेहरों से जनता ऊब चुकी है। ऐसे में यदि मोहित डिमरी जैसे युवा राजनीति में आते हैं तो उनका स्वागत करना होगा। भले ही वो पंचायत चुनाव से शुरूआत करें, लेकिन उम्मीद तो बनती ही है। मैं चाहता हूं कि प्रदेश को जानने के लिए युवा पंचायत चुनाव में अधिक से अधिक संख्या में भाग लें। क्योंकि यदि राज्य को विकास की पटरी पर लाना है तो गांवों का समझना होगा। गांवों की समझ तो पंचायत से ही आएगी। युवाओं से अपील, पंचायत चुनाव में अधिक से अधिक भागीदारी करें। 

नोट - पंचायत चुनाव में मोहित डिमरी जैसे युवाओं की भागीदारी क्यों जरूरी? अगले भाग में।


पंचायत चुनाव से हो शुरूआत, बड़े लक्ष्य की शुरुआत छोटे-छोटे कदमों से ही।  पंचायत चुनाव से हो शुरूआत, बड़े लक्ष्य की शुरुआत छोटे-छोटे कदमों से ही। Reviewed by केदारखण्ड एक्सप्रेस on August 29, 2019 Rating: 5
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